जम्मू में Shri Mata Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता रद्द
Shri Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता रद्द: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए MBBS कोर्स चलाने के लिए दिया गया लेटर ऑफ परमिशन (LoP) वापस ले ली. ये फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. अब ये नया कॉलेज इस साल MBBS कोर्स नहीं चला पाएगा.
Shri Mata Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता रद्द होने की वजह क्या है?
NMC के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 2 जनवरी 2026 को कॉलेज का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया. इसमें न्यूनतम मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया जैसे फैकल्टी की बड़ी कमी कई रिपोर्ट्स में 39% तक शॉर्टेज, इंफ्रास्ट्रक्चर में खामियां, क्लिनिकल मटेरियल की कमी, मरीजों की कम संख्या, इनपेशेंट-आउटपेशेंट लोड कम होना और बेड ऑक्यूपेंसी खराब होना पाया गया.
NMC ने इसे 2023 के नियमों का सीधा उल्लंघन माना. कई शिकायतें आने के बाद ये इंस्पेक्शन हुआ था. कॉलेज को पहले 8 सितंबर 2025 को लेटर ऑफ परमिशन (LoP) मिली थी, लेकिन अब वो खत्म कर दी गई है. इसके अलावा कॉलेज की बैंक गारंटी भी जब्त कर ली जाएगी. NMC की ये सख्त कार्रवाई दूसरे मेडिकल कॉलेजों के लिए कड़ा संदेश है कि जमीन पर पूरी तैयारी के बिना कोर्स नहीं चल सकता.

Shri Mata Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता रद्द: पढ़ाने के लिए किताबें और लैब तक नहीं मिले
इसके अलावा, कुछ विभागों में लैब और अनुसंधान प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं थीं. व्याख्यान कक्ष न्यूनतम मानक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थे. लाइब्रेरी में 1500 पुस्तकों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 744 किताबें थीं, और आवश्यक पंद्रह पत्रिकाओं के मुकाबले केवल दो पत्रिकाएं थीं. रिपोर्ट में एआरटी केंद्र और एमडीआर-टीबी के प्रबंधन के लिए सुविधाओं की अनुपस्थिति, साथ ही कुछ विभागों में बुनियादी ढांचे की गंभीर कमियों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अलग-अलग पुरुष और महिला वार्डों का अभाव शामिल है. आवश्यकता के मुकाबले केवल दो ऑपरेशन थिएटर काम कर रहे थे. ओपीडी क्षेत्र में कोई माइनर ओटी नहीं थी, और पैरा-क्लिनिकल विषयों के लिए उपकरण अपर्याप्त पाए गए.
Shri Mata Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता रद्द: पिछले साल ही मिली थी मान्यता
मेडिकल कॉलेज ने NMC में 5 दिसंबर और 19 दिसंबर, 2024 को एक पब्लिक नोटिस के तहत नया MBBS प्रोग्राम शुरू करने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद संस्थान को 2025-26 एकेडमिक सत्र के लिए 50 MBBS छात्रों को एडमिशन देने की मंजूरी मिली थी. 50 सीट में से 42 सीट पर मुस्लिम छात्रों का नामांकन हुआ. इसी के बाद मुस्लिम छात्रों के एडमिशन को लेकर विवाद शुरू हो गया था.

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द: पहले से एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स का क्या होगा?
चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड ने मंगलवार को एक ऑर्डर जारी किया जिसमें कहा गया है कि एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट्स को केंद्र शासित प्रदेश एडमिनिस्ट्रेशन की सक्षम अथॉरिटी द्वारा जम्मू- कश्मीर के दूसरे मेडिकल इंस्टिट्यूट में एडजस्ट किया जाएगा. इसका मतलब है कि एडमिशन लेने वाले किसी भी स्टूडेंट को एडमिशन वापस लेने के फैसले की वजह से MBBS सीट नहीं गंवानी पड़ेगी. इसके बजाय, उन्हें जम्मू- कश्मीर के दूसरे मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में उनके रेगुलर मंज़ूर सीटों के अलावा एडजस्ट किया जाएगा.
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज MBBS मान्यता रद्द: श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को लेकर क्यों मचा था बवाल?
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस काकड़ियाल के पहले MBBS बैच 2025-26 में 50 सीटों पर एडमिशन होने के बाद जम्मू में भारी बवाल मच गया था. वजह थी कि NEET मेरिट लिस्ट में 50 स्टूडेंट्स में से 42 स्टूडेंट्स मुस्लिम, जबकि सिर्फ 7 हिंदू और 1 सिख स्टूडेंट था.
जम्मू में करीब 60 संगठनों ने मिलकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति बनाई, जिसने मेडिकल कॉलेज के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया. संघर्ष समिति ने न सिर्फ एडमिशन प्रोसेस पर सवाल उठाए, बल्कि मेडिकल कॉलेज को बंद करने की भी मांग की. हाल ही में समिति ने जम्मू के सिविल सेक्रेटेरिएट के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला और बिगड़ गय. इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को साफ कहा था कि एडमिशन प्रोसेस पूरी तरह से मेरिट पर आधारित था और पूरे मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया.
#WATCH जम्मू (जम्मू-कश्मीर): मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ” हम हर तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हालात बदलते हैं और हमें कई तरह से टेस्ट करते हैं। राज्य का दर्जा वापस दिलाना एक चुनौती है, आने वाला बजट सत्र एक चुनौती है, और टूरिज्म सीजन की सफलता एक… pic.twitter.com/wTk0lMj6hD
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 6, 2026
हिंदू संगठनों और लोकल लोगों ने इसे श्राइन बोर्ड के फंड का गलत इस्तेमाल बताया, क्योंकि कॉलेज श्राइन बोर्ड की जमीन पर बना है और ज्यादातर फंडिंग हिंदू भक्तों के चढ़ावे से आती है. उनका कहना था कि हिंदू तीर्थयात्रियों की आस्था से जुड़े पैसे का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन सीटें ज्यादातर एक खास कम्युनिटी को मिल गईं.ये हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और भेदभाव जैसा लगता है. विरोध की अगुवाई विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल, शिव सेना, युवा राजपूत सभा, सनातन धर्म सभा समेत करीब 60 संगठनों की श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने की.

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