बिहार चुनाव 2025: JMM ने महागठबंधन से तोड़ा नाता, 6 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी और अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। रांची में JMM महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, हम 6 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हर जगह की स्थिति अलग है।
Bihar Election 2025: किन सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार?
रांची में JMM महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने घोषणा की है कि वह बिहार की इन 6 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। जिसमें धमदाहा, चकाई, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती शामिल है। JMM महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “पार्टी ने बिहार चुनाव में छह सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हमने महागठबंधन के सभी घटक दलों – राजद, कांग्रेस और विशेष रूप से राजद से संपर्क किया, क्योंकि यह वहां सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी है। उनके माध्यम से, हमने अपनी चिन्हित सीटों के बारे में कांग्रेस आलाकमान से संपर्क किया, जहाँ हमारे कार्यकर्ता लंबे समय से JDU-भाजपा गठबंधन के खिलाफ लड़ रहे हैं… झारखण्ड में, हमने 2019 में राजद और कांग्रेस का समर्थन किया। हमने उन्हें अपनी सीटें दीं, हमने केवल राजद को सीटें नहीं दीं। सात सीटों में से, चतरा से केवल एक विजयी उम्मीदवार को पाँच साल के लिए मंत्री बनाया गया… 24 चुनावों के बाद भी, हमने राजद को छह सीटें दीं और उनके एक विजयी उम्मीदवार को वर्तमान मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण पद दिया। हमने फैसला किया है कि हम धमदाहा, चकाई, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती से अपने उम्मीदवार उतारेंगे।” यह सभी सीटें दूसरे चरण के मतदान में शामिल होंगी।
बिहार चुनाव 2025: JMM की आधिकारिक घोषणा
#WATCH | JMM to contest on 6 seats alone in #BiharElection2025
In Ranchi, JMM General Secretary and Spokesperson Supriyo Bhattacharya says, “Dhamdaha, Chakai, Katoria, Manihari, Jamui and Pirpainti – we will contest these. The situation everywhere is different. Why is Congress… pic.twitter.com/lbtPNoqUqf
— ANI (@ANI) October 18, 2025
Bihar Election 2025: महागठबंधन के लिए बढ़ी मुश्किलें
JMM के इस फैसले से महागठबंधन को झटका माना जा रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों का वोटबैंक निर्णायक भूमिका निभाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है, जिससे सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार की इन छह सीटों पर अब मुकाबला और ज्यादा रोचक हो गया है।
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